में सालों से देखता आया हु

में सालों से देखता आया हु,

मेरे अब्बूको नमाज़ पठते हुए और मेरी माँ को पूजा करते हुए।

वह दोनों बचपनसे साथ रहे है
साथ बड़े हुए है
वह कॉलेजभी साथ ही में जाया करते थे
और शादी के बाद कई सालों से एक छत की निचे जी रहे है

ऐसा नहीं की वह कभी झगड़ते नहीं
ऐसा नहीं की उनके बिच कभी मनमुटाव नहीं होते।

मैंने देखा है माँ को सबके सामने अब्बूको डांटते हुए, और फिर शामको चार मिल दूर सब्जी मंडी जाकर, गाजर लाकर, अब्बुका पसन्दीदा हलवा बनाते हुए।

मैंने देखा है अब्बू को माँ पर हाथ उठाते, और फिर रातको तकिये तलें आंसू बहाते हुए

पर कभी उनके बिच की लड़ाइयोकी वजह उनका मज़हब नहीं रहा, उन्होंने अपनाया है एकदूजेको उनके अस्तित्व के साथ।

इसी लिए मज़हब के नाम पर खून खराबा और आतंक मचाते इन गुंडों को देखता हु तो सहम जाता हु, डर जाता हु में।

में सालों से देखता आया हु
मेरे अब्बूको नमाज़ पठते हुए और मेरी माँ को पूजा करते हुए।

ऐसा नहीं की वह कभी झगड़ते नहीं,
ऐसा नहीं की उनके बिच कभी मनमुटाव नहीं होते,
पर कभी उनके बिच की लड़ाइयोकी वजह उनका मज़हब नहीं रहा,
कभी नहीं।

-केवल गोहिल